VedicGurukul

वक्ता सबसे पहले इस प्रश्न का उत्तर देते हैं कि गुरुकुल से पढ़ाई करने के बाद करियर क्या होगा और लोग यह सोचते हैं कि संस्कृत पढ़ने या हवन, पूजा आदि करने से जीवन यापन संभव नहीं है और यह केवल पंडित या पुरोहित बनने तक सीमित हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुकुल में पढ़ाई का उद्देश्य केवल यही नहीं है, बल्कि विद्या प्राप्त करने वाला व्यक्ति अनेक प्रकार की योग्यताएँ अर्जित करता है और शास्त्रों में विद्या से संबंधित छह कार्य बताए गए हैं जिनमें पहला पठनम अर्थात पढ़ना और पढ़ाना है इसका मतलब है कि छात्र शोध कार्य करेगा, अध्ययन करेगा और इसे दूसरों को पढ़ाएगा। दूसरा यजनम है यानि हवन करना और करवाना, यह केवल कर्मकांड नहीं बल्कि जीवन संस्कारित करने के लिए संस्कार प्रदान करना था। तीसरा दानम है जो गुरुकुल योग्य और सक्षम होने पर समाज को दान देकर योगदान देता है, लेना बहुत कम महत्वपूर्ण था।

वक्ता बताते हैं कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गुरुकुल से पढ़ाई करने वाले व्यक्ति कई क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं और विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और योग के शिक्षकों की आवश्यकता है, कम से कम दस लाख ऐसे लोग चाहिए जो प्रमाणिक रूप से भारतीय संस्कृति का प्रचार और शिक्षण कर सकें। यह नई तरह की एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप के समान है जिसमें नौकरी की आवश्यकता नहीं है। गुरुकुल में पढ़ाई करने वाला व्यक्ति एक संस्था के आंतरिक कार्यों, छात्रों के प्रबंधन, दैनिक जीवन की व्यवस्था, पढ़ाई और अध्यापन को पूरी तरह समझ जाता है और एक संस्था का मार्गदर्शन करने में सक्षम बनता है।

इसके अलावा, वह जीवन भर अध्ययन और अध्यापन कर सकता है और शास्त्रों के ज्ञान को जीवित रख सकता है। यह प्रणाली जीवित संग्रहालय और पुस्तकालय के समान है जिसमें आचार्य और शिष्य वही ग्रंथ पढ़ते हैं जो प्राचीन काल में पढ़े गए थे, और इस प्रकार संस्कृति लगातार जीवित रहती है। गुरुकुल से पढ़ाई करने वाला व्यक्ति उत्तम लेखक और शोधकर्ता बन सकता है, अपने अध्ययन के माध्यम से समाज के लिए मूल्यवान ज्ञान निकाल सकता है और नई स्मृतियों का निर्माण कर सकता है।

अंततः, यह व्यक्ति उत्तम नागरिक और चरित्रवान मानव बनकर समाज में योगदान देगा और नेतृत्व प्रदान करेगा। वह भविष्य का आचार्य होगा, जो संस्कारों, ज्ञान और संस्कृति को दीर्घकाल तक आलोकित करेगा और समाज एवं राष्ट्र को जागृत करने वाले पुरोहित का कार्य करेगा।