अथ गुरुमंत्र : गायत्री मंत्र की प्रामाणिक व्याख्या

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इस पुस्तिका को लिखने के कारण –

विद्या की परम्परा तभी तक सार्थक व फलवती है जब तक वह साधारण जनता को अधिक-से-अधिक लाभान्वित करती रहे। विद्या- दान को ही शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है। सर्वेषामेव दानानां ब्रह्मदानं विशिष्यते – मनु०। अपने अनेक वर्षों के स्वाध्याय काल में गुरुमन्त्र गायत्री से सम्बन्धित कुछ तथ्य प्राप्त हुए हैं, मैं उनको सबके हित के लिए प्रस्तुत करना अपना दायित्व समझता हूँ। गायत्री मन्त्र की प्राचीन विधि को जानने के उपरान्त आधुनिक काल के लिए उसका विनियोग करना है। इसे साधारण व विशेष लोगों के लिए उपयोगी बनाना है। यद्यपि वैदिक संध्या गायत्री की ही व्याख्या है, किन्तु सुगम न होने से जन-सामान्य के लिए कठिन हो जाती है। गायत्री जप द्वारा विद्या ज्ञान बढने से सामान्य जन में न केवल संध्या का सामर्थ्य आ पाएगा, अपितु वेदार्थ तक उसकी पहुंच हो पाएगी और प्राचीन वैदिक परम्परा की शुद्ध रूप से पुनर्स्थापना होगी। आज समाज में सच्चे, निष्कपट परोपकारी गुरुओं का अभाव-सा है। ऐसे में साधारण जनता जिसको आस्तिकता बनाये रखने के लिए किसी सहारे, आश्रय अथवा आलम्बन की आवश्यकता होती है, कहीं न कहीं ढोंग व पाखण्ड में फंस जाती है। गुरु-मन्त्र के नाम से जनता को अनेक प्रकार से भ्रमित (Misguide) किया जा रहा है और गायत्री मन्त्र के माहात्म्य को अनेक पौराणिक गल्पों के माध्यम से महिमामण्डित किया जा रहा है। गायत्री के २४ अक्षर मानकर २४ मूर्तियों तक की कल्पना कर ली गई है। इन सबका निराकरण करने के लिए गुरुमन्त्र गायत्री के सत्य पक्ष को जनता के सम्मुख रखना आवश्यक है, जिससे जनता को सच्चे गुरुमन्त्र का आलम्बन प्राप्त हो सके और यह अमूल्य मानव जन्म व्यर्थ होने से बच सके। सज्जन लोगों का संगठन व उनका परस्पर सहयोग संसार की उन्नति व सुखों का मूल होता है। गायत्री मन्त्र का जप करने वाले और इसे सर्वश्रेष्ठ मानने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है। सभी गायत्री उपासक व सच्चे ईश्वर भक्तों का गायत्री मन्त्र की व्याख्या के रूप में एक

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Description

अथ गुरुमंत्र :
गायत्री मंत्र की प्रामाणिक व्याख्या

ॐ भूर्भुवः स्वः
तत् सवितुर्वरण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः
प्रचोदयात् ।

डॉ. प्रशांत ‘आचार्य’

 

पुस्तक पढ़ने से लाभ
क्या आप चाहते हैं कि आपकी स्मृति में वृद्धि हो सके ?
आपको एकाग्रता की प्राप्ति हो सके ?
आपको बड़े-से-बड़े और सूक्ष्म-से-सूक्ष्म विषय पर विचार करने की
धारणा शक्ति प्राप्त हो सके ?
क्या आप ईश्वर को जानना व अनुभव करना चाहते है ?
क्या आप ईश्वरीय शक्तियों से सम्पन्न होकर शक्तिमान बनना चाहते हैं ?
क्या आप ईश्वर से सम्बन्ध स्थापित कर उसकी सहायता व मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते है ?
क्या आप अपनी बुरी आदतों को छोड़ देना चाहते है ?
क्या आप अपने बुरे संस्कारों को भी नष्ट करने का संकल्प रखते हैं ?
क्या आप अदम्य इच्छाशक्ति के स्वामी बनना चाहते हैं ?
क्या आप भय-क्लेश मुक्त जीवन जीना चाहते हैं ?
क्या आप सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों सुखों की प्राप्ति की इच्छा रखते है ?
क्या आप जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष को उपलब्ध होकर अपने जीवन को धन्य कर करना चाहते हैं ?
क्या आप सनातन ऋषि-परम्परा का अनुसरण करते हुए प्राचीनतम गुरु मन्त्र को जानना चाहते है ?
क्या आप भक्ति के तीनों अङ्गों स्तुति, उपासना और प्रार्थना का स्वरूप जानना चाहते है ?

यदि उपर्युक्त में से किन्ही भी प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’, है तो आपको निस्संदेह गुरुमन्त्र गायत्री का अर्थ-विचारपूर्वक जप करना चाहिये। यदि आप गायत्री मन्त्र के महत्व को जानना चाहते है, उसके जप की विधि, उसके अर्थ की व्याख्या जानना चाहते है और गायत्री को अपने जीवन का अङ्ग बनाना चाहते है तो आप इस पुस्तिका का अद्योपांत (प्रारम्भ से अन्त तक) अवलोकन व चिन्तन अवश्य करें।

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