शाकल — ऋग्वेद की मुख्य शाखा; शाकल्य ऋषि द्वारा संकलित, उत्तर भारत में प्रचलित; उदाहरण: शाकल संहिता।
अश्वलायन — ऋग्वेद शाखा; यज्ञ-विधि केंद्रित; अश्वलायन ऋषि; कुरुक्षेत्र क्षेत्र; उदाहरण: अश्वलायन गृह्यसूत्र।
शांखायन — ऋग्वेद शाखा; ब्राह्मण ग्रंथों के लिए प्रसिद्ध; शांखायण ऋषि; मालवा क्षेत्र; उदाहरण: शांखायन ब्राह्मण।
माण्डूकायन — प्राचीन ऋग्वैदिक शाखा; अधिकांश भाग विलुप्त; प्राचीन आर्य काल की।
चारक — कृष्ण यजुर्वेद शाखा; चारक ऋषि; दक्षिण में प्रचलित।
आह्वरक — यजुर्वैदिक शाखा; याज्ञिक मंत्र प्रधान।
कठ — कृष्ण यजुर्वेद शाखा; कठ ऋषि; गांधार–कश्मीर क्षेत्र; उदाहरण: कठोपनिषद।
प्राच्य-कठ — कठ शाखा की पूर्वी परंपरा; बंगाल–बिहार क्षेत्र।
कपिष्ठल-कठ — कठ शाखा का उपभेद; पंजाब–कश्मीर क्षेत्र।
चारायणीय — ऋग्वेद शाखा; उत्तर भारत में प्रचलित।
वारतन्तवीय — यजुर्वेद शाखा; ग्रंथ विलुप्त।
मानव — कृष्ण यजुर्वेद; मनु ऋषि; उदाहरण: मानव धर्मसूत्र।
वाराह — दक्षिण भारत की यजुर्वैदिक शाखा।
हरिद्रावी — द्रविड़ क्षेत्रों की शाखा।
श्यामायनीय — लघु शाखा; जानकारी कम।
औखी — यजुर्वेद शाखा; गृह्यसूत्र प्रधान।
जाबाल — साम/अथर्ववेद शाखा; जाबाल ऋषि; उदाहरण: जाबालोपनिषद।
बौधेय — कृष्ण यजुर्वेद; बौधायन ऋषि; उदाहरण: बौधायन धर्मसूत्र।
काण्व — शुक्ल यजुर्वेद शाखा; उदाहरण: काण्व संहिता।
पौन्द्रवत्स — बंगाल–पूर्वांचल क्षेत्र की शाखा।
अवटिक — ऋग्वेद संबंधी; कम ज्ञात।
औधेय — अनुष्ठान प्रधान शाखा।
पिप्पलाद — अथर्ववेद शाखा; पिप्पलाद ऋषि; उदाहरण: प्रश्न उपनिषद।
शौनक — अथर्ववेद की मुख्य शाखा; शौनक ऋषि; उदाहरण: शौनक संहिता।