हनुमान जी के उड़ने का रहस्य : वैज्ञानिक तथ्य या पौराणिक कथा।
इस प्रसंग में हनुमान जी के उड़ने और उनके अद्भुत यान के वर्णन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है और बताया गया है कि वाल्मीकि रामायण में हनुमान जी के उड़ने के कई श्लोक उपलब्ध हैं, विशेषकर सुंदरकांड में श्लोक संख्या 56 से 69 तक, जिनमें उनके उड़ने की विधि, गति, रूप और […]
सही गुरु की पहचान कैसे करें ?
आज की चर्चा का मुख्य विषय यह है कि प्रत्येक व्यक्ति चाहे कितना भी अच्छा और योग्य क्यों न हो, उसकी उन्नति एक सीमित स्तर तक रुक जाती है क्योंकि वह अपनी क्षमताओं का पूर्ण आकलन नहीं कर पाता और अपनी वास्तविक शक्ति को नहीं जान पाता जिससे वह सोचता है कि आगे बढ़ना संभव […]
सफलता के बाद भी खालीपन क्यों महसूस होता है?
मनुष्य के जीवन में जो निरंतर भागदौड़ है उसका मूल कारण यही है कि उसने सुख को ठीक से समझा नहीं और साधन को ही साध्य मान लिया। मन में यह ख्याल चलता रहता है कि कुछ पाना है, कहीं पहुँचना है, किसी से जुड़ना है या कुछ धन कमा लेना है। जब तक वह […]
सच्चिदानंद का अर्थ क्या है ? | आनंद का परिचय
यह पूरा प्रसंग ब्रह्मानंद वल्ली के आठवें अनुवाक की व्याख्या है जिसमें ऋषियों ने मनुष्य के आनंद की गहराई और उसकी सीमाओं को स्पष्ट किया है। सामान्यतया हम आनंद को इंद्रियों की संतुष्टि या मनोविकारों की पूर्ति तक ही सीमित मान लेते हैं, किंतु ऋषियों ने इसका सूक्ष्म और गहन विवेचन किया। उन्होंने कहा कि […]
संपूर्ण हवन यज्ञ करने की विधि | घर पर हवन कैसे करें ?
यह पूरा वर्णन हमें यह समझाता है कि भारत की परंपराएँ कितनी गहरी और वैज्ञानिक रही हैं और समय के साथ उनमें कितना परिवर्तन आया है। लेखक ने पहले उदाहरणों से स्पष्ट किया कि जैसे सरदार पटेल की प्रतिमा में हर गाँव से लोहा मंगवाकर उसे सामूहिक योगदान का प्रतीक बनाया गया, वैसे ही राम […]
वैशेषिक दर्शन क्या है ? | दर्शन में विज्ञान क्या है ?
लेखक यहाँ यह बताना चाहता है कि प्राचीन ऋषियों ने अपने सूत्रों के माध्यम से ब्रह्मांड और पदार्थों के स्वरूप पर जिस प्रकार का चिंतन किया, वह केवल उस समय के लिए ही नहीं बल्कि आज की आधुनिक विज्ञान की खोजों से भी कहीं अधिक गहरा और व्यापक था। जब कोई बड़ी सभ्यता नष्ट हो […]
वैदिक शिक्षा क्या है?
कि यह शिक्षा आपको सर्वांगीण विकास कराएगी। ये केवल कर्मकांड की शिक्षा नहीं है। हमारी जो शिक्षा केवल कर्मकांड की नहीं, केवल धार्मिक शिक्षा नहीं है, केवल जीवन के एक एक्सपेक्ट को लेकर के चलने वाली शिक्षा नहीं है, जीवन के हर आयाम को छूने वाली शिक्षा है। हमारे यहाँ पर गुरुकुल में 64 विद्याओं […]
वैदिक भक्ति का स्वरूप | वैदिक भक्ति क्या है ?
लेखक यहाँ यह स्पष्ट करना चाहता है कि आज के समय में वास्तविक अर्ष भक्ति लुप्त होती जा रही है। अर्ष भक्ति का आशय यह है कि हमारी बुद्धि और शिक्षा का आधार केवल ऋषियों द्वारा रचित ग्रंथ ही हों, न कि इधर-उधर के दिखावे वाले या आडंबरपूर्ण विचार। स्वामी दयानंद जी ने स्वयं हजारों […]
वैदिक गुरुकुल क्या है ?
यह पूरा वक्तव्य लेखक की उस दृष्टि को प्रकट करता है जिसमें गुरुकुल केवल पठन पाठन का केंद्र न होकर शोध और अनुसंधान का भी प्राणस्थान बन सके। लेखक यह स्पष्ट करता है कि गुरुकुल में शोध कार्य का मूल उद्देश्य वैदिक ग्रंथों, अर्ष ग्रंथों और प्राचीन शास्त्रों को सुव्यवस्थित रूप से आधुनिक काल के […]
वैदिक गुरुकुल का प्रारूप | गुरुकुल क्या है ?
यह पूरा वक्तव्य गुरुकुल की स्थापना, उसके उद्देश्य और भावी योजना का एक गहन चिंतन है जिसमें लेखक यह सिद्धांत प्रस्तुत करता है कि शिक्षा का मूल स्वरूप शुल्क या व्यापार नहीं बल्कि ब्राह्मण वृत्ति अर्थात ज्ञान की वृद्धि और दान की परंपरा है। वह कहता है कि गुरुकुल निशुल्क होना चाहिए, विद्यार्थी चाहे तो […]