VedicGurukul

जीवन का उद्देश्य क्या है?

वक्ता सबसे पहले यह बताते हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य अक्सर स्पष्ट नहीं होता और लोग जीवन के उद्देश्य की खोज करते समय प्रायः शास्त्रों या दूसरों की कही सुनी बातों का सहारा लेते हैं लेकिन अक्सर इन उद्देश्यों में स्थूल प्रलोभन छिपा होता है जैसे समाज में प्रतिष्ठा, मान, धन आदि प्राप्त करना […]

जानिए गुरुकुल की 5 प्रतिज्ञा जो आपका जीवन बदल देंगी !

वक्ता सबसे पहले यह बताते हैं कि गुरु और शिष्य के बीच कई प्रकार के मंत्र हैं जो उपनिषद काल से प्रचलित हैं और महाभारत से भी पहले के समय में प्रचलित थे लगभग 67000 साल पहले। इनमें एक प्रसिद्ध मंत्र है जो आज भी भोजन से पहले बोला जाता है और इसमें पाँच प्रतिज्ञाएँ […]

गुरुकुल की शिक्षा – बेरोजगारी का संभावित समाधान। Vedic Education vs Modern Education

वक्ता सबसे पहले इस प्रश्न का उत्तर देते हैं कि गुरुकुल से पढ़ाई करने के बाद करियर क्या होगा और लोग यह सोचते हैं कि संस्कृत पढ़ने या हवन, पूजा आदि करने से जीवन यापन संभव नहीं है और यह केवल पंडित या पुरोहित बनने तक सीमित हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुकुल में […]

गायत्री छन्द की विशेषताएं।॥

वक्ता सबसे पहले पवमानसूम और उसके तीन प्रकारों के गायन का वर्णन करते हैं और बताते हैं कि यह तीन छंदों में किया गया है एक गायत्री छंद, दूसरा छंद और तीसरा जगती छंद हैं। उन्होंने गायत्री छंद की विशेषता समझाई कि यह 24 अक्षरों का होता है और ओम से नहीं बल्कि तत्सवितुर से […]

क्या वेद में विज्ञान है ? वैदिक विज्ञान क्या है?

वक्ता सबसे पहले एक प्रश्न उठाते हैं कि जब हम गुरुकुल से शिक्षा पाकर निकल रहे हैं तो समाज में यह शंका क्यों उठती है कि गुरुकुल का अर्थ है हजारों वर्ष पुरानी वैदिक शिक्षा, जो मानो पाषाण काल में लौटने जैसी है। लोग कहते हैं कि वैदिक शिक्षा का अर्थ है बैलगाड़ी और हाथ […]

उपदेश क्यों देते हैं? | किसे देना चाहिए उपदेश?

आरंभ में प्रश्न उठता है कि उपदेश क्यों दिया जाए और उपदेश देने वाला कौन होता है तो उत्तर मिलता है कि उपदेश का उद्देश्य व्यक्ति को उसके कर्तव्य का बोध कराना है, यह बताना है कि जीवन में क्या करना है और क्या नहीं करना है। उपदेश को तीन भागों में बाँटा गया है […]

ईशावास्योपनिषद् का परिचय

यह अंश यजुर्वेद के अध्यात्म प्रधान चालीसवें अध्याय की व्याख्या पर आधारित है। इसमें बताया गया कि आज के सत्र में कुल 1975 मंत्र पूरे किए गए और यही ईशावास्य उपनिषद कहलाता है, जिसे वेदांत कहा जाता है, क्योंकि यह ज्ञान की पराकाष्ठा है। वेदांत का अर्थ है जहाँ ज्ञान की अंतिम स्थिति पहुँचती है […]

आर्य समाज का कार्य अभी अधूरा है ?

यह अंश वेदों और आर्य समाज के लक्ष्य पर केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि परमात्मा ने ऋषियों के माध्यम से वेदवाणी धरती पर दी और उसी वाणी के प्रचार-प्रसार के लिए आर्य समाज की स्थापना हुई। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि वर्तमान समय में हमारा मुख्य लक्ष्य क्या है। लक्ष्य यही है […]

अमेरिका में आचार्य जी का प्रवचन

यह भाषण आर्य समाज के 150 वर्ष पूरे होने पर दिया गया है जिसमें वक्ता ने आर्य समाज के महत्व, उसकी सनातन विचारधारा, उसके सिद्धांतों और भविष्य की दिशा पर गहन प्रकाश डाला है। आर्य समाज को समुद्र के समान बताते हुए कहा गया कि इसने जीवन के प्रत्येक आयाम को छुआ है – शिक्षा, […]

ऋग्वेद क्या है?

ऋग्वेद को ज्ञान प्रधान माना गया है और यह चारों वेदों में सबसे बड़ा है। इसमें लगभग दस हज़ार मंत्र हैं और यदि एक गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र की ही व्याख्या इतनी विस्तृत हो सकती है तो सोचिए कि दस हज़ार मंत्रों में कितना ज्ञान छिपा होगा। ऋग्वेद पारायण यज्ञ का लाभ यह है […]