Description
अथ गुरुमंत्र :
गायत्री मंत्र की प्रामाणिक व्याख्या
॥
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत् सवितुर्वरण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः
प्रचोदयात् ।
॥
डॉ. प्रशांत ‘आचार्य’
पुस्तक पढ़ने से लाभ
क्या आप चाहते हैं कि आपकी स्मृति में वृद्धि हो सके ?
आपको एकाग्रता की प्राप्ति हो सके ?
आपको बड़े-से-बड़े और सूक्ष्म-से-सूक्ष्म विषय पर विचार करने की
धारणा शक्ति प्राप्त हो सके ?
क्या आप ईश्वर को जानना व अनुभव करना चाहते है ?
क्या आप ईश्वरीय शक्तियों से सम्पन्न होकर शक्तिमान बनना चाहते हैं ?
क्या आप ईश्वर से सम्बन्ध स्थापित कर उसकी सहायता व मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते है ?
क्या आप अपनी बुरी आदतों को छोड़ देना चाहते है ?
क्या आप अपने बुरे संस्कारों को भी नष्ट करने का संकल्प रखते हैं ?
क्या आप अदम्य इच्छाशक्ति के स्वामी बनना चाहते हैं ?
क्या आप भय-क्लेश मुक्त जीवन जीना चाहते हैं ?
क्या आप सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों सुखों की प्राप्ति की इच्छा रखते है ?
क्या आप जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष को उपलब्ध होकर अपने जीवन को धन्य कर करना चाहते हैं ?
क्या आप सनातन ऋषि-परम्परा का अनुसरण करते हुए प्राचीनतम गुरु मन्त्र को जानना चाहते है ?
क्या आप भक्ति के तीनों अङ्गों स्तुति, उपासना और प्रार्थना का स्वरूप जानना चाहते है ?
यदि उपर्युक्त में से किन्ही भी प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’, है तो आपको निस्संदेह गुरुमन्त्र गायत्री का अर्थ-विचारपूर्वक जप करना चाहिये। यदि आप गायत्री मन्त्र के महत्व को जानना चाहते है, उसके जप की विधि, उसके अर्थ की व्याख्या जानना चाहते है और गायत्री को अपने जीवन का अङ्ग बनाना चाहते है तो आप इस पुस्तिका का अद्योपांत (प्रारम्भ से अन्त तक) अवलोकन व चिन्तन अवश्य करें।










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